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Meet of Brother And Sister From Social media

Publish Date:Mon, 09 Dec 2019 07:39 PM (IST)

जयपुर, नरेन्द्र शर्मा। Brother And Sister. राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले में सोशल मीडिया (वॉट्एसएप) के कारण करीब 72 साल पहले विभाजन के समय बिछड़े भाई-बहन संपर्क में आए। सोशल मीडिया ने सीमाओं की बंदिशों को लांघते हुए सन 1947 में विभाजन के समय जम्मू-कश्मीर में हुए कबायली हमले के दौरान बिछड़े भाई-बहन को एक-दूसरे से मिलवाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है। भाई रणजीत सिंह श्रीगंगानगर में रह रहे हैं तो बहन भज्जो (शकीना) पाकिस्तान में रह रही है।

सिख परिवार की भज्जो का पाकिस्तान में जाकर नाम शकीना हो गया। दोनों भाई-बहनों ने रविवार को वीडियो कॉलिंग कर के बात की। इस दौरान दोनों भाई बहनों की आंखों में खुशी के आंसू छलके। 72 साल पहले बिछड़े भाई-बहन श्रीगंगानगर जिले के रायसिंह नगर में रहने वाले एडवोकेट हरपाल सिंह, पीओके निवासी जुबेर और कश्मीर के पुंछ निवासी रोमी शर्मा की बदौलत मिल सके हैं। इन तीनों ने विभाजन और कबायली हमले के दौरान पुंछ में बिछड़े लोगों का सोशल मीडिया पर ग्रुप बना रखा है।

कबायली हमले के दौरान परिवार से बिछड़ गई थी बहन

दरअसल, अक्टूबर 1947 में कश्मीर में हुए कबायली हमले के दौरान कश्मीर के मुजफ्फराबाद जिले के दुदरवैना गांव के लंबरदार मतवाल सिंह का परिवार भी प्रताड़ित हुआ था। कबायली हमले के दौरान लंबरदार मतवाल सिंह के परिवार को भी अपना गांव छोड़ना पडा था। गांव छोड़ते समय उनकी पांच साल की पोती भज्जो परिवार से बिछड़ गई। परिवार के अन्य सदस्य अपनी जान बचाने के लिए चक्कर में उसे ढंग से तलाश भी नहीं कर सके। उस सयम भारत सरकार ने कबायली हमले के दौरान विस्थापित 500 परिवारों को राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले में बसाया गया। इनमें से 367 परिवार वर्तमान में यहां रह रहे हैं, शेष काम-धंधे की तलाश में दूसरे शहरों में जाकर बस गए।

श्रीगंगानगर में रह रहे परिवारों में से एक लंबरदार मतवाले सिंह का भी परिवार भी है, जो रायसिंहनगर में रह रहा है। यह यहां खेती करते हैं। एडवोकेट हरपाल सिंह ने बताया कि लंबरदार मतवाल सिंह के पोते रणजीत सिंह ने 1947 में कबायली हमले के दौरान अपनी बड़ी बहन भज्जो के बिछड़ने की चर्चा की तो सोशल मीडिया के माध्यम से एक-दूसरे से मुलाकात हो गई। भज्जो वर्तमान में गुलाम कश्मीर के कुमीकोट गांव में रह रही है। भज्जो ने वहां शादी कर ली और अब उसका बेटा जमशेद शेख रावलपिंडी में अपना खुद का व्यवसाय करता है।

जमशेद शेख भी सोशल मीडिया के उस ग्रुप से जुड़ा हुआ है। काफी प्रयासों के बाद भज्जो और रणजीत सिंह के भाई-बहन होने का पता चला। इसके बाद दोनों ने वीडियो कॉलिंग कर के बात की। एक-दूसरे को फोटो भी भेजी। रणजीत सिंह का कहना है कि अब करतारपुर कॉरिडोर के माध्यम से दोनों भाई-बहन एक-दूसरे से मिलने की इच्छा रखते हैं। उम्मीद है यह इच्छा शीघ्र ही पूरी हो जाएगी। 

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Posted By: Sachin Mishra

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