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Wednesday 21 August 2019
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loksabha election: राजस्थान में महिला उम्मीदवारों पर दांव लगाने से कतराते रहे हैं प्रमुख दल – राजस्थान में महिला उम्मीदवारों पर दांव लगाने से कतराते रहे हैं प्रमुख दल

loksabha election: राजस्थान में महिला उम्मीदवारों पर दांव लगाने से कतराते रहे हैं प्रमुख दल – राजस्थान में महिला उम्मीदवारों पर दांव लगाने से कतराते रहे हैं प्रमुख दल
जयपुर

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और कांग्रेस राजस्थान में महिला प्रत्याशियों पर दांव लगाने से कतराती रही हैं। इस बार कांग्रेस ने प्रदेश में लोकसभा की कुल 25 सीटों में से केवल चार और बीजेपी ने केवल तीन सीटों पर महिलाओं को टिकट दिया है।

वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने चार सीटों जयपुर (शहर), जयपुर (ग्रामीण), नागौर और दौसा सीट पर महिला उम्मीदवारों को चुनाव मैदान में उतारा है, वहीं बीजेपी ने राजसमंद, भरतपुर और दौसा सीट पर महिला उम्मीदवारों को टिकट दिया है। लोकसभा चुनाव में राज्य में महिलाओं को कम प्रतिनिधित्व देने के मामलें में पीपल्स यूनियन ऑफ सिविल लिबर्टीज (पीयूसीएल) की कविता श्रीवास्तव ने बताया कि राजनीति में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बहुत कम और शर्मनाक है और इसके लिए सभी राजनीतिक पार्टियां जिम्मेदार हैं। देश में केवल तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने सबसे ज्यादा महिलाओं को प्रतिनिधित्व दिया है।

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उन्होंने कहा कि महिलाओं को आरक्षण देने के लिए जब तक कानून नहीं बनेगा, कोई भी पार्टी महिलाओं को उचित प्रतिनिधित्व नहीं देगी क्योंकि कोई भी राजनीतिक पार्टी महिलाओं के साथ सत्ता को साझा नहीं करना चाहती। उन्होंने कहा कि राजनीतिक पार्टियों की इच्छा शक्ति नहीं होने के कारण राजनीति में महिलाओं को उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिल पा रहा है। जब तक इस संबंध में कानून नहीं बनेगा तब तक महिला वर्ग इससे वंचित रहेगा। उन्होंने महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण नहीं मिलने के लिए सभी राजनीतिक पार्टियों को जिम्मेदार बताया है।

‘महिलाओं के लिए आरक्षण है जरूरी’

राजस्थान महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष और बीजेपी नेता सुमन शर्मा ने बताया कि महिलाओं को जब तक 33 प्रतिशत आरक्षण नहीं मिलेगा तब तक महिलाओं को विधानसभा या लोकसभा चुनाव में उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिलेगा। आज भी 16वीं लोकसभा में महिलाओं का प्रतिनिधित्व 11.3 प्रतिशत है।

कांग्रेस ने इन महिलाओं पर जताया है भरोसा

कांग्रेस ने जयपुर (शहर) से जयपुर की पूर्व मेयर ज्योति खंडेलवाल को बीजेपी के रामचरण बोहरा के सामने, जयपुर ग्रामीण से ओलिंपियन कृष्णा पूनिया को केंद्रीय मंत्री और ओलिंपियन राज्यवर्धन सिंह राठौड़ के सामने, नागौर से ज्योति मिर्धा को बीजेपी समर्थित राष्ट्रीय लोक तांत्रिक पार्टी के संयोजक और विधायक हनुमान बेनीवाल के सामने और दौसा सीट पर सविता मीणा को चुनाव मैदान में उतारा है। उनका मुकाबला बीजेपी की पूर्व सांसद जसकौर मीणा से होगा।


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देवकीनंदन गुर्जर से दीया कुमारी का मुकाबला

बीजेपी ने राजसमंद लोकसभा सीट पर सवाईमाधोपुर की पूर्व विधायक और जयपुर राजघराने से संबंध रखने वालीं दीया कुमारी को चुनाव मैदान में उतारा है। उनका मुकाबला कांग्रेस के उम्मीदवार देवकीनंदन गुर्जर से होगा। राज्य में कुल चार करोड़ 84 लाख 79 हजार 229 मतदाताओं में से दो करोड़ 32 लाख 14 हजार 231 महिला मतदाता हैं। वहीं दो करोड़ 52 लाख 64 हजार 998 पुरुष मतदाता हैं। पिछले दो लोकसभा चुनावों में महिला मतदाताओं के प्रतिशत में भी बढ़ोतरी हुई है।

  

  • चुनाव चाहे लोकसभा के हों या राज्यसभा या विधानसभा के, किसी त्योहार से कम नहीं होते। हर बार ऐसी यादें भी रह जाती हैं जो चुनावी इतिहास के पन्नों पर दर्ज हो जाती हैं। आगे तस्वीरों में देखें, ऐसे ही कुछ ऐतिहासिक पल…

  • ​फ्लैशबैक: देखें, चुनावी इतिहास की खास तस्वीरें...

    1989 की चुनावी तस्वीर को देखते तीन दोस्त। 1984 में भारी जीत के बाद 1989 में कांग्रेस को सत्ता गंवानी पड़ी थी। उस वक्त भारतीय जनता पार्टी ने लंबी छलांग मारते हुए 2 सीटों से बढ़कर 85 सीटें अपने नाम की थीं। कांग्रेस उन चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर जरूर उभरी थी लेकिन जनता दल ने बीजेपी और लेफ्ट के साथ मिलकर वीपी सिंह के नेतृत्व में सरकार बनाई थी।

  • ​फ्लैशबैक: देखें, चुनावी इतिहास की खास तस्वीरें...

    आज के समय में भले ही चुनावों के वक्त टीवी पर बढ़-चढ़रक कवरेज होती है, पहले के समय में बहुत सरलता से चुनावों का प्रसारण किया जाता है। इस तस्वीर में देखें, दिल्ली का एक स्टूडियो जहां 1971 के लोकसभा चुनावों का प्रसारण करने की तैयारी की जा रही है। यह चुनावों के टेलिविजन कवरेज के शुरुआती मौकों में से एक था।

  • ​फ्लैशबैक: देखें, चुनावी इतिहास की खास तस्वीरें...

    साल 1978 में कर्नाटक के चिक्कमगलूरू में इंदिरा गांधी के खिलाफ जनता पार्टी के लिए प्रचार करने जाते जॉर्ज फर्नांनडीस। इंदिरा इमर्जेंसी के बाद हुए 1977 के चुनावों में सत्ता से बाहर हो चुकी थीं और अक्टूबर 1978 में चिक्कमगलूरू से उपचुनाव के लिए खड़ी हुई थीं। प्रचार के दौरान फर्नांडीस ने गांधी को ऐसा ‘कोबरा’ कह डाला था जो वोटरों को काट सकता था। हालांकि, इंदिरा ने इस चुनाव में जनता पार्टी के वीरेंद्र पाटिल को 70,000 वोटों से हरा दिया था।

  • ​फ्लैशबैक: देखें, चुनावी इतिहास की खास तस्वीरें...

    आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एनटी रामाराव 1987 में हरियाणा विधानसभा चुनाव के दौरान झज्जर में लोकदल के नेता देवीलाल के लिए चुनाव प्रचार करते हुए। वह अपने साथ तेलुगू देशम पार्टी के ऐतिहासिक वाहन भी हरियाणा ले गए थे जिसे चैतन्य रतम नाम दिया गया था। लोकदल-बीजेपी ने चुनाव में विरोधियों का सूपड़ा साफ कर दिया और देवी लाल मुख्यमंत्री बने।

  • ​फ्लैशबैक: देखें, चुनावी इतिहास की खास तस्वीरें...

    आज हम नतीजे घर से लेकर बाजारों तक में लगीं बड़ी-बड़ी स्क्रीन्स पर देखते हैं। तस्वीर में देखिए, नई दिल्ली में टाइम्स ऑफ इंडिया ऑफिस के पास स्कोरबोर्ड पर डिस्प्ले किए गए 1980 लोकसभा चुनाव के नतीजे।

  • ​फ्लैशबैक: देखें, चुनावी इतिहास की खास तस्वीरें...

    इलाहाबाद में प्रचार करते अमिताभ बच्चन। 1984 लोकसभा चुनाव में अमिताभ बच्चन ने इलाहाबाद से चुनाव लड़ा था, उन्होंने एचएन बहुगुणा को हराया था। अमिताभ इस सीट से 1,87,795 मतों से जीते थे हालांकि तीन साल बाद उन्होंने राजनीति छोड़ने का ऐलान कर सांसद पद से इस्तीफा दे दिया था।

  • ​फ्लैशबैक: देखें, चुनावी इतिहास की खास तस्वीरें...

    1984 के चुनावों में बांद्रा के पाली हिल में एक पोलिंग बूथ पर अपनी बारी का इंतजार करते ऐक्टर ऋषि कपूर।

  • ​फ्लैशबैक: देखें, चुनावी इतिहास की खास तस्वीरें...

    महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री शरद पवार मुंबई में परेल स्थित राष्ट्रीय मिल मजदूर संघ के दफ्तर का 4 नवंबर 1989 को नारियल फोड़कर बॉम्बे की 6 सीटों पर लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस के प्रचार अभियान की शुरुआत करते हुए। उनके साथ प्रत्याशी (बाएं से दाएं) डीटी रुपवते, शरद दिघे, मुरली देवड़ा, सुनील दत्त और उद्योग मंत्री रामराव अदिक।

  • ​फ्लैशबैक: देखें, चुनावी इतिहास की खास तस्वीरें...

    1991 में राजीव गांधी बॉम्बे में एक रैली को संबोधित करते हुए। इससे पहले के लोकसभा चुनाव सिर्फ 16 महीने पहले ही हुए थे। 1991 के चुनावों में किसी पार्टी को बहुमत में नहीं मिला था और कांग्रेस ने अल्पमत की सरकार बनाई थी। इसी दौरान 20 मई को चुनाव के पहले चरण के मतदान के एक दिन बाद ही 21 मई को प्रचार करते हुए तमिलनाडु में राजीव गांधी की हत्या कर दी गई थी।

  • ​फ्लैशबैक: देखें, चुनावी इतिहास की खास तस्वीरें...

    ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ज्योति बासु के साथ। उस वक्त ममता केंद्रीय युवा, खेल और बाल कल्याण मंत्री थीं। यह मुलाकात कोलकाता की राइटर्स बिल्डिंग में हुई थी। बासु ने 23 साल तक पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री का पद संभाला और सबसे लंबे वक्त तक सीएम रहने वाले देश के मुख्यमंत्रियों में से एक रहे। उस वक्त इन दोनों को शायद ही इस बात का अंदाजा होगा कि इस मुलाकात के 20 साल बाद ममता बनर्जी खुद उस पद पर काबिज होंगी। इस बीच ममता ने कांग्रेस से निकलकर अपनी खुद की पार्टी ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस बनाई।

  • ​फ्लैशबैक: देखें, चुनावी इतिहास की खास तस्वीरें...

    14 मार्च 2000 को कांग्रेस के टिकट पर राज्यसभा के लिए मुंबई विधानसभा में नामांकन भरते लेजंडरी ऐक्टर दिलीप कुमार। उनके साथ महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख। दिलीप कुमार 2000 से 2006 तक राज्यसभा सांसद रहे।



2014 में 61.39 फीसदी महिलाओं ने किया था मतदान

वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में महिलाओं के मतदान का प्रतिशत 44.85 प्रतिशत रहा था, जो 2014 में बढ़कर 61.39 प्रतिशत हो गया। पिछले 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने छह महिलाओं उम्मीदवारों को चुनाव मैदान में उतारा था। लेकिन उनमें से एक भी उम्मीदवार चुनाव नहीं जीत पाई थीं। वहीं, बीजेपी की एकमात्र महिला उम्मीदवार संतोष अहलावत ने झुंझुनूं से जीत दर्ज की थी। पार्टी ने इस बार अहलावत का टिकट काट दिया है। पिछले दो लोकसभा चुनाव की बात की जाए तो 2009 में 31 महिलाओं ने भाग्य आजमाया, जिनमें से तीन विजयी रहीं। इसके बाद 2014 में 27 महिलाओं ने चुनाव लड़ा, जिनमें से केवल एक महिला प्रत्याशी ने विजय हासिल की।

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लोकसभा चुनाव: त्रिशंकु संसद होने पर क्षेत्रीय दल निभा सकते हैं बड़ी भूमिका

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