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Wednesday 12 December 2018
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Kirodi Lal Meena: आदिवासी क्षेत्र जीतने को BJP ने लगाया किरोड़ी लाल मीणा पर दांव, लेकिन सामने हैं कई चुनौतियां – आदिवासी क्षेत्र जीतने को BJP ने लगाया किरोड़ी लाल मीणा पर दांव, लेकिन सामने हैं कई चुनौतियां

Kirodi Lal Meena: आदिवासी क्षेत्र जीतने को BJP ने लगाया किरोड़ी लाल मीणा पर दांव, लेकिन सामने हैं कई चुनौतियां – आदिवासी क्षेत्र जीतने को BJP ने लगाया किरोड़ी लाल मीणा पर दांव, लेकिन सामने हैं कई चुनौतियां
सवाई माधोपुर, टोंक, करौली, सपोटरा

राजस्थान विधानसभा चुनाव से पहले जहां सभी राजनीतिक दल अपनी पुरजोर ताकत झोंकने में जुटे हैं, वहीं भारतीय जनता पार्टी के लिए आदिवासी क्षेत्र में चुनौतियां सिर उठाकर खड़ी हैं। पार्टी ने अपना दांव किरोड़ी लाल मीणा पर लगाया है और उनकी पत्नी को टिकट दिया है, लेकिन मीणा के प्रभाव के सामने मैदान में और भी नेता हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। मीणा की गिरती लोकप्रियता भी बीजेपी के लिए चिंता की वजह हो सकती है।

करौली जिले की सपोटरा आरक्षित सीट पर मीणा की पत्नी गोल्मा देवी चुनाव लड़ रहीं हैं। दो बार विधायक और एक बार मंत्री रह चुकीं गोल्मा देवी का चुनावी क्षेत्र मीणा ने राजगढ़-लक्ष्मणगढ़ से बदलकर सपोटरा कर दिया है। वह कांग्रेस के विधायक रमेश मीणा से साल 2013 में बीजेपी को मिली हार का हिसाब बराबर करना चाहते हैं। 2013 में रमेश ने बीजेपी के ऋिषिकेश मीणा को हराया था।

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पत्नी के अलावा किरोड़ी लाल ने अपने भतीजे राजेंद्र मीणा को महुआ से टिकट दिलाया है। उन्हें टिकट देने के लिए बीजेपी को ओम प्रकाश हूडला का टिकट काटना पड़ा जिन्होंने पिछले चुनाव मे गोल्मा देवी को हराया था। हूडला अब बागी उम्मीदवार के तौर पर महुआ से मैदान में हैं। वहीं, कांग्रेस के अजय बोहारा ने मुकाबला त्रिकोणीय बना दिया है।

मीणा समुदाय होता है निर्णायक

सपोटरा और महुआ मीणा बेल्ट में आने वाले 17 विधानसभा क्षेत्रों में से हैं। मीणा बेल्ट सवाई माधोपुर, टोंक, करौली और दौसा में फैली है। इन इलाकों में मीणा आबादी करीब 25% है और चुनावों में निर्णायक भूमिका निभाती है। साल 2013 के चुनाव में बीजेपी ने 12 सीटें जीती थीं जबकि कांग्रेस के खाते में सिर्फ तीन सीटें आई थीं। दो सीटें किरोड़ी लाल की नैशनल पीपल्स पार्टी ने जीती थीं जिन्होंने बाद में अपने सभी विधायकों के साथ बीजेपी जॉइन कर ली थी।

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मीणा के सामने युवा चुनौतियां

हालांकि, माना जाता है कि मीणा की लोकप्रियता और उनका आधार धीरे-धीरे नीचे जा रहा है। इस वजह से आने वाले चुनाव बीजेपी और मीणा दोनों के लिए दिशा तय करेंगे। राजनीतिक जानकार राजेंद्र मीणा का कहना है, ‘साल 2008 तक मीणा समुदाय के सामने नेता के रूप में केवल किरोड़ी ही थे लेकिन अब कई प्रभावशाली लोगों ने राजनीति में कदम रखा है।’ उन्होंने बताया कि रमेशा मीणा और ओम प्रकाश हूडला जैसे युवा नेता किरोड़ी लाल की लोकप्रियता में सेंध लगा चुके हैं।

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‘किरोड़ी की पार्टी नहीं तो बीजेपी-कांग्रेस में सीधी टक्कर’

कांग्रेस के विधायक सपोटरा रमेश मीणा पेशे से इंजिनियर हैं। वह करोड़ी लाल की पत्नी गोल्मा के सामने मैदान में हैं। उन्होंने किरोड़ी लाल के सामने खुली चुनौती रखी है। उन्होंने कहा है, ‘किरोड़ी लाल का वक्त खत्म हो चुका है। वह झूठ बोलते हुए बचकर नहीं निकल सकते।’ उधर, वोटर भी अपना मन बना चुके हैं। सवाई माधोपुर में चाय बेचने वाले राकेश मीणा कहते हैं कि पिछली बार चुनाव में ‘डाक साहब’ किरोड़ी लाल की पार्टी NPP खड़ी थी। तब कांग्रेस, बीजेपी और NPP में वोट बंटे थे लेकिन इस बार NPP नहीं है तो वोट या तो कांग्रेस को जाएंगे या बीजेपी को।

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खुश नहीं माधोपुर

उनका कहना है कि सवाई माधोपुर के लोग बिना उन्हें विश्वास में लिए किरोड़ी लाल के बीजेपी में शामिल होने के फैसले से खुश नहीं हैं। एक अन्य दुकानदार गजानंद मीणा ने बताया, ‘(वसुंधरा) राजे की बीजेपी में खोए उनके सम्मान के लिए हमने लड़ाई लड़ी लेकिन उन्होंने राज्य सभा सदस्या बनने के लिए बीजेपी जॉइन कर ली। हमें लग रहा है कि हमसे धोखा हुआ है।’

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