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Tuesday 25 June 2019
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सोयाबीन

सोयाबीन

सोयाबीन दाल की एक ऐसी किस्म, जो प्रोटीन से भरपूर है, सोयाबीन है। अधिक मात्रा में प्रोटीन होने के कारण इसका पोषक मान बहुत अधिक होता है। प्रोटीन के साथ-साथ इसमें विटामिन और खनिज तथा विटामिन ‘बी’ काॅमप्लेक्स और विटामिन ‘ई ’ काफी अधिक मात्रा में होता है, जो शरीर निर्माण के लिए आवश्यक एमिनो ऐसिड प्रदान करते हंै। हकीकत तो यह है कि सोयाबीन में दूध, अंडा तथा मांस से भी अधिक प्रोटीन होता है।9
-सोयाबीन में लाभदायक रसायन तथा, सैपोनिन, साइटोस्टेरोल तथा फेनोलिक एसिड जैसे कैंसर विरोधी, हृदयाघात विरोधी तथा स्वास्थ्यवर्धक तत्व होते हैं।
-इसमें स्तन कैंसर रोकने तथा अन्य स्वास्थ्य लाभ करवाने वाले गुण होते हैं।
-सोयाबीन के बीजों को अंकुरित कर खाने से त्वचा का रंग साफ होता है, शारीरिक वृद्धि तेजी से होती है, कब्ज दूर होता है |
-मधुमेह, त्वचा रोग, हृदय रोग, कैंसर, रक्ताल्पता में यह लाभकारी है।
– त्वचा रोग: सोयाबीन के बीजों को अंकुरित कर खाने से एग्ज़िमा और अन्य त्वचा रोग ठीक होते हैं।
-मधुमेह: सोयाबीन का दूध पीने से, या अंकुरित सोयाबीन खाने से मधुमेह के रोगियों को लाभ होता है, क्योंकि इसमें स्टार्च नहीं के बराबर होता है।
-रक्ताल्पता: सोयाबीन में लोहा भी बहुत अधिक मात्रा में होता है। इसलिए रक्त की कमी को पूरा करने में यह अधिक लाभकारी है। जिन रोगियों की पाचन शक्ति कमजोर है, उन्हें सोयाबीन के दूध का उपयोग करना चाहिए।
-हृदय रोग: क्योंकि सोयाबीन में कोलेस्ट्रोल नहीं होता, इसलिए हृदय रोगियों के लिए सोयाबीन लाभकारी है। दिल को ताकत देता है।
-यदि व्यक्ति इसका नियमित सेवन करें तो लंबे समय तक युवा भी बना रह सकता है।
-रजोनिवृत्ति के दौरान सोयाबीन खाएं |
– १० किलो गेहू के आटे में १ किलो सोयाबिन का आटा मिलाने से शक्ति वर्धक बन जाता है |
::- दूध बनाना ::-
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दूध बनाने के लिए सोयाबीन को कम से कम 12 घंटे भिगो कर, फिर उसका छिलका उतार कर, अच्छी तरह महीन पीस कर पेस्ट बना कर, 3 गुना पानी मिला कर, मंदी आंच पर गर्म करें। उसके बाद महीन कपड़े में छान लेने से दूध तैयार हो जाता है। यह दूध गाय के दूध की तुलना में किसी प्रकार से कम नहीं। बच्चों के लिए यह अत्यंत पौष्टिक है। आंतों को स्वस्थ रखने के लिए यह दूध अत्यंत उपयोगी है। इसकी दही भी स्वास्थ्यवर्धक है।




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