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Friday 20 September 2019
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सूरत की 2000 महिलाओं के पास है शराब पीने का लायसेंस

सूरत की 2000 महिलाओं के पास है शराब पीने का लायसेंस

sharabसूरत। सूरत को कई लोग लजीज व्यंजन के नाम से जानते होंगे, कुछ वहां की साड़ियों के नाम से जानते होंगे, पर यह शहर अब शराब पीने वाली महिलाओं के नाम से भी जाना जाने लगा है। जी हां यहां 2000 महिलाओं के पास शराब पीने का लायसेंस है। 2014 में 5000 के पास लायसेंस था, अब 2016 में अप्रैल तक यह संख्या 14000 तक हो गई है।

आबकारी विभाग के अनुसार इस समय शहर में कुल 14395 लोगों के पास शराब पीने का लायसेंस है। इसमें 2000 महिलाएं शामिल हैँ। गुजरात में जितनी शराब पी जाती है, उसमें सूरत की हिस्सेदारी सबसे अधिक है। ऐसा माना जाता है, क्योंकि दमन यहां से बहुत करीब है। सरकार लायसेंस स्वास्थ्य विभाग की सिफारिश के आधार पर देती है। इसमें महिलाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। वे स्वयं लायसेंस के लिए आवेदन करती हैं। नशाबंदी विभाग के पास हर महीने करीब 200 आवेदन प्राप्त होते हैँ। इसमें महिलाओं के आवेदन भी शामिल हैं।

कैसे करते हैं आवेदन

नाम न छापने की शर्त पर एक अधिकारी ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा दिया जाने वाला लायसेंस 40 की उम्र हो जाने के बाद दिया जाता है। इसमें पुरुष या महिला पर किसी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जाता। 40 की उम्र के बाद यदि डॉक्टर कहे कि मरीज को जो रोग है, उसके निदान के लिए शराब आवश्यक है, तो उस आधार पर शराब पीने का लायसेंस दिया जाता है।

लायसेंस के लिए क्या आवश्यक?

एक सामान्य व्यक्ति द्वारा शराब पीने का लायसेंस प्राप्त करने के लिए 5 साल का आईटी रिटर्न भरना आवश्यक होता है। इन पांच रिटर्न में पिछले वर्ष के रिटर्न में आय कम से कम 3 लाख रुपए होना आवश्यक है। आवेदन के साथ एमडी डॉक्टर की फाइल भी देनी होती है। जिसमें यह साफ लिखा होता है कि शराब इनके स्वास्थ्य के लिए किस तरह से आवश्यक है। इसके बाद आवेदक यदि किसान है, तो उसके पास 20 बीघा जमीन होना आवश्यक है। यदि जमीन न हो, तो राजस्व अधिकारी के पास से 3 लाख की आय का प्रमाण पत्र निकलवाना होता है। यही प्रक्रिया महिलाओं के मामले में भी अपनाई जाती है।

आवेदक को कितनी शराब मिलती है?

लायसेंस के लिए आवेदन की उम्र 40 से 50 वर्ष होनी आवश्यक है। उसे महीने में व्हीस्की की तीन बोतल अथवा बीयर की 30 बोतल मिलती है। उम्र् 50 से 65 वर्ष हो, तो महीने में व्हीस्की की चार बोतल और बीयर की 40 बोतलें मिलती हैँ। उम्र 65 से अधिक हो, तो यह संख्या बढ़कर 5 और 50 हो जाती है। महिलाओं के लिए कोई अलग से केटेगरी न होने के कारण महिलाओं को भी उम्र के हिसाब से इतनी ही शराब मिलती है।

त्योहारों में खूब पी जाती है

सूरत में रहने वाली कुछ जातियों में त्योहारों या खुशी के समय शराब पिलाने की परंपरा है। शादी के समय तो इस परंपरा को खुले आम देखा जा सकता है। पर कुछ जातियों में यह परंपरा है कि सामने वाले पक्ष को शराब पिलाना अतिआवश्यक होता है। कई स्थानों पर यह परंपरा दम तोड़ रही है, पर कुछ लोग इसे अभी भी चला रहे हैं।

सभी लायसेंस में स्वास्थ्य का एक ही कारण अनिंद्रा

हेल्थ ग्राउंड पर जो लायसेंस इश्यु किया जाता है, उसके लिए सरकार का स्वास्थ्य विभाग के मेडिकल आफिसर की रिपोर्ट जरूरी है। नई सिविल अस्पताल के अधिकारियों द्वारा यह जानकारी दी गई है कि सभी मामलों में हाईपर टेंशन और अनिंद्रा का कारण दर्शाकर लायसेंस इश्यु कराया जाता है।

सामाजिक रिवाजों में कानून भंग करने की विवशता

शराब पीने की लायसेंसधारी महिला हसुबेन राणा का कहना है कि शहर की कई जातियों में शराब परोसने की प्रथा कायम है। कई बार इस प्रथा को चलाए रखने के लिए कानून भंग करना भी हमारी मजबूरी हो जाती है। ऐसे हालात में शराब बंदी दूर करने पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

शराबबंदी के कारण इसका खुलेआम गलत उपयोग

लायसेंस लेकर शराब पीने वाली महिला चंदनबेन जरीवाला का कहना है कि इंसान का स्वभाव है कि जिस पर प्रतिबंध लगाया जाए, उसे भंग करने की इच्छा अधिक होती है। इसलिए शराबबंदी के कारण उसका दुरुपयोग भी खुले आम किया जाता है। अब महिला मुख्यमंत्री आ गई हैं, तो वे ही कोई क्रांतिकारी निर्णय लें और शराबबंदी दूर करें, ताकि इसका दुरुपयोग न होने पाए।




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