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Thursday 29 October 2020
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शशि थरूर के खिलाफ किस अपराधिक मामले की सुनवाई पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक

शशि थरूर के खिलाफ किस अपराधिक मामले की सुनवाई पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक

नई दिल्ली। उच्च न्यायालय ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर के खिलाफ आपराधिक मानहानि के मामले की निचली अदालत में सुनवाई पर रोक लगा दी थी। न्यायालय ने थरूर की ओर से निचली अदालत द्वारा जारी समन को चुनौती देने वाली याचिका पर विचार करते हुए यह अंतरिम आदेश दिया है। जस्टिस सुरेश कैत ने इसके साथ ही शिकायतकर्ता व भाजपा नेता राजीव बब्बर को नोटिस जारी कर जवाब देने को कहा है। बब्बर ने थरूर के खिलाफ अदालत में शिकायत दाखिल कर कथित तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक बयान देने के आरोप में आपराधिक मानहानि का मुकदमा चलाने की मांग की है। न्यायालय ने थरूर के खिलाफ निचली अदालत में सुनवाई पर रोक लगाते हुए शिकायतकर्ता भाजपा नेता को मामले की अगली सुनवाई से पहले अपना पक्ष रखने को कहा है। मामाले की अगली सुनवाई 9 दिसंबर को होगी।

थरूर की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और विकास पाहवा ने उच्च न्यायालय ने निचली अदालत के 27 अप्रैल, 2019 के आदेश को रद्द करने की मांग की है। इस आदेश जरिए ही निचली अदालत ने थरूर के खिलाफ भाजपा नेता की शिकायत पर विचार करते हुए समन जारी किया था। उन्होंने मानहानि का मुकदमा चलाने की मांग को लेकर दाखिल भाजपा नेता की शिकायत को भी खारिज करने की मांग की है। वरिष्ठ अधिवक्ता पाहवा ने निचली अदालत को रद्द करने की करते हुए कहा कि यह आदेश कानून की नजर में गलत होने के साथ आपराधिक न्यायशास्त्र के तय सिद्धांतों के खिलाफ है। उन्होंने शिकायतों को पूरी तरह से झूठा बताते हुए इसे रद्द करने की मांग की।

भाजपा नेता ने शिकायत दाखिल करते हुए कहा है कि थरूर के बयान से उनकी धार्मिक भावना आहत हुई है। आरोप है कि कांग्रेस नेता थरूर ने अक्तूबर 2018 में कथित तौर पर अपने एक बयान में दावा था कि ‘आरएसएस के एक नेता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र की मोदी की तुलना शिवलिंग पर बैठे विच्छू से की थी।’ मानहानि के इस मामले में थरूर को अदालत से जमानत मिली हुई है। भाजपा नेता बब्बर ने कहा है कि वह शिवभक्त हैं और थरूर के उक्त बयान से करोड़ों लोगों की भावनाएं आहत हुई है।




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