Search
Saturday 18 November 2017
  • :
  • :

बाड़मेर में कर्नल सोनाराम की बैठकें कांग्रेस व बीजेपी में खलबली

कर्नल सोनाराम ने कांग्रेस-भाजपा दोनों में मचा दी है खलबली

विद्रोही आवाज

कर्नल सोनाराम चौधरी का विधानसभा चुनावों से ठीक पहले बाड़मेर शहर में बैठकें लेना और लोगांे के बीच पहुंचना चर्चा में आ गया है।

बाड़मेर.कर्नल का यह दखल भाजपा और कांग्रेस दोनों के नेताओं के लिए खलबली वाला है। कर्नल पहले कांग्रेस से तीन बार सांसद रहे। फिर बायतु से कांगे्रस का विधायक का चुनाव जीते और इसके बाद जसवंतसिंह की टिकट कटी और वे भाजपा से सांसद का चुनाव जीतकर चौथी बार संसद में पहुंचे है। अब कर्नल बाड़मेर शहर में बैठकें करने लगे है तो राजनीतिक गलियारों में यह फुसफुसाहट होने लगी है कि कहंी कर्नल इस बार बाड़मेर से विधानसभा के चुनावों की गणित तो नहीं बैठा रहे है।

बाड़मेर की राजनीति में पहले गंगाराम चौधरी अबूझ पहेली बने हुए थे। वे जिधर हवा का रुख देखते उधर अपने आप को फिट कर देते और कांग्रेस, भाजपा और निर्दलीय चुनाव लड़कर हर बार उस तरफ ही रहे जिस तरफ सत्ता रही। गंगाराम की यह राजनीति बेजोड़ मानी जाती थी। अब यह स्थिति कर्नल सोनाराम के साथ भी बैठने लगी है। तीन बार कांग्रेस से सांसद रहे कर्नल सोनाराम अचानक बायतु से विधायक का टिकट ले आए और राज्य की राजनीति में दखल कर दिया। इस दौरान उनकी कांग्रेस के तात्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोतसे पटरी नहीं बैठी और वे लगातार बयानबाजी करते रहे। कांग्रेस में कर्नल केा अपना भविष्य नजर नहीं आया तो उन्होंने भाजपा में अपनी राजनीतिक गोटियां जमा दी और जसवंतसिंह का टिकट कटा और कर्नल सोनाराम को मिल गया।

 

शहर में सक्रिय हुए है कर्नल-

बाड़मेर शहर में सांसद का वार्ड अनुसार बैठकें लेना लंबे समय से नहीं हो रहा था। सांसद का चुनाव जीतने के बाद अकसर ग्रामीण क्षेत्र पर ही ज्यादा ध्यान दिया जाता है। कर्नल सोनाराम चौधरी इन दिनों बाड़मेर शहर में बैठकें लेने लगे है। एेसे में अब यह चर्चा गर्मागर्म है कि कर्नल कहीं विधानसभा में बाड़मेर के मूड में तो नहीं है।

कांग्रेस में भी मची खलबली-

विधायक मेवाराम और कर्नल सोनाराम चौधरी धुर विरोधी है। जैसे ही कर्नल ने बाड़मेर श्हार में बैठकें लेनी शुरू की है कांग्रेस में भी खलबली है। कांग्रेस भी अब इस लिहाज से सोचने लगी है कि कर्नल सोनाराम बाड़मेर विधानसभा से चुनाव लड़ते है तो क्या स्थितियां हो सकती है।

प्रियंका भी नहीं है साथ-

कर्नल सोनाराम चौधरी की इन बैठकों में यूआईटी चेयरमैन डा. प्रियंका चौधरी साथ नहीं है। डा. ्रपियंका ने पिछला विधानसभा चुनाव यहां से लड़ा था और अब भी वे बाड़मेर विधानसभा से पहली दावेदार मानी जाती है। एेसे में कर्नल की बैठकों में प्रियंका को दूर रखना या प्रियंका का दूरी रखना दोनों ही बातें चर्चा में है।




Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *