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Thursday 18 July 2019
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पचपदरा मे मानवेंद्रसिंह की स्वाभिमान रैली 22 को

पचपदरा मे मानवेंद्रसिंह  की स्वाभिमान रैली 22 को

जोधपुर। राज्य में विधानसभा चुनावों की सरगर्मियां जोर पकड़ने के बीच पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता रहे जसवंत सिंह के पुत्र विधायक मानवेंद्र सिंह अगले हफ्ते स्वाभिमान रैली कर रहे हैं। सिंह का कहना है कि 22 सितंबर की इस रैली में ही उनकी आगे की राजनीतिक राह का फैसला होगा। सिंह ने हालांकि स्पष्ट कहा है कि यह रैली किसी वर्ग (राजपूत) विशेष की नहीं है बल्कि इसमें राज्य की सभी 36 कौमों के ‘स्वाभिमानियों’ को बुलाया गया है। मानवेंद्र अभी प्रदेश की शिव विधानसभा सीट से विधायक हैं। मानवेंद्र ने भाजपा से अलग होने या कांग्रेस के साथ जाने की अटकलों पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। उन्होंने यह कहकर बात टाल दी कि अब आगे की राजनीतिक राह का फैसला तो स्वाभिमान रैली में ही होगा। यहां यह भी गौरतलब है कि स्वाभिमान रैली की तैयारियों की एक बागडोर मानवेंद्र की पत्नी चित्रा सिंह संभाल रही हैं जिन्होंने हाल ही में वसुंधरा राजे पर खुलकर हमला बोला। बाड़मेर में राजपूत समाज की युवा आक्रोश रैली को संबोधित करते हुए चित्रा सिंह ने राजस्थान को ‘वसुंधरा से मुक्त कराने’ की बात कही। मुख्यमंत्री राजे ने अपनी मौजूदा राजस्थान गौरव यात्रा के रूट में बाड़मेर लोकसभा क्षेत्र को शामिल नहीं किया वहीं मानवेंद्र व उनकी पत्नी स्वाभिमान रैली के लिए जनसंपर्क में जुटे रहे। भाजपा व मानवेंद्र के बीच जारी खींचतान के मुद्दे पर जब पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष मदन सैनी से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि पार्टी ने मुद्दों पर विचार के लिए मानवेंद्र से संपर्क किया है। उन्होंने कहा, ‘‘बातचीत चल रही है। हमने उनसे पहले भी संपर्क किया था और जो भी मुद्दे हैं उन पर बात करेंगे।’’ वहीं बाड़मेर में भाजपा के जिलाध्यक्ष जालम सिंह रावलोत ने दावा किया है कि इलाके के राजपूत भाजपा के साथ हैं और उनमें पार्टी से किसी तरह की नाराजगी नहीं है। प्रस्तावित रैली को सामाजिक कार्यक्रम बताते हुए उन्होंने कहा कि इसका कोई राजनीतिक असर नहीं होगा। उल्लेखनीय है कि मानवेंद्र की स्वाभिमान रैली बाड़मेर व जोधपुर के बीच स्थित पचपदरा में प्रस्तावित है। पचपदरा में हाल ही में भाजपा व कांग्रेस ने भी बड़ी सभाओं के जरिए अपनी ताकत दिखाई है। 2014 के आम चुनावों में पार्टी की टिकट नहीं मिलने पर जसवंत सिंह निर्दलीय के रूप में मैदान में उतरे थे। हालांकि वह कांग्रेस से भाजपा में आए कर्नल सोना राम चौधरी से चुनाव हार गए थे। मानवेंद्र को भी अप्रैल 2014 में पार्टी से निलंबित कर दिया गया था।




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