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Tuesday 26 September 2017
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दुबई गए और दुनिया की विशालतम बिल्डिंग बुर्ज खलीफा नही देखी यह तो असम्भव सा है,एक लाख हाथियों के बराबर बिल्डिंग का वजन

दुबई गए और दुनिया की विशालतम बिल्डिंग बुर्ज खलीफा नही देखी यह तो असम्भव सा है,एक लाख हाथियों के बराबर बिल्डिंग का वजन

विद्रोही आवाज़ के संपादकीय सलाहकार श्री गणपत भंसाली की दुबई यात्रा व विशालतम बिल्डिंग बुर्ज खलीफा की यादगार संस्मरण फोटो गेलेरी —photo11
photo-9                                कोई अगर दुबई की यात्रा पर आए और दुनिया की एक मात्र विशाल बुर्ज खलीफा बिल्डिंग नही देखे तो वो यात्रा पूर्ण नही समझी जाती, ये ठीक वैसा ही हे की दिल्ली गए और लाल किला व क़ुतुब मीनार देखे बिना लौट गए, या या फिर डल झील देखे बिना कश्मीर की यात्रा पूर्ण नही होती, हालाँकि 4 जनवरी 2010 में उद्घाटित हुई तथा 9800 करोड़ रुपयों की लागत से निर्मित दुनियां की एक मात्र ऊँची से ऊँची बुर्ज खलीफा बिल्डिंग का महत्व इससे कहीं ज्यादा हैं,दुबई यात्रा का पूरा का पूरा आकर्षण इस बिल्डिंग के इर्द-गिर्द समाया हुआ रहता हैं, हालाँकि हमारे पुत्र राज भंसाली व पुत्रवधु विवेका तथा पौते-पौती नभ्य-मान्या की सार-सम्भाल करने हेतु हम दोनों पति-पत्नि का अमूमन दुबई आवागमन बना रहता हैं, जितनी बार दुबई आए तो बुर्ज खलीफा से सटे दुबई मॉल व उसके पिछवाड़े में फाउंटेन देखने हेतु अनेकों बार आने का संयोग हुआ, लेकिन यह पहला मौका था कि 452 मीटर (1.483 फुट) की ऊंचाई पर स्थित बुर्ज खलीफा की 124 वी मन्ज़िल यानि ‘एट द टॉप’ पर हम पहुंचे। इस बिल्डिंग में प्रवेश करने हेतु सर्व प्रथम लम्बी क्यू में खड़े हुए, हमारी खुशनसीबी थी कि लिफ्ट तक पहुंचने में नम्बर जल्दी भी लग भी गया,, इस ऊंचाई पर जो लिफ्ट जाती हे वो भी दुनिया की तीव्र गति से चलने वाली या यूँ कहें की तेज दौड़ने वाली लिफ्ट हैं, 124 वी मन्ज़िल की चढ़ाई ये लिफ्ट महज 77 सेकेण्ड में पूर्ण कर देती हैं, जैphoto-1से-जैसे ऊंचाई पर पहुंचेंगे वैसे-वैसे कानो में वेसी ही आवाज आएगी जैसे हवाई जहाज में बैठने के बाद आती हैं, इंजीनियरों के हुनर से ‘एट द टॉप’ का तापमान नीचे के तल के मुकाबले 15 डिग्री सेल्सियर कम हो जाता हैं, तथा गर्मी के थपेड़ों के बीच इस बिल्डिंग का तापमान दुबई की जानलेवा गर्मी में भी अलबता ठंडक प्रदान करता हैंphoto-8, जब हम ‘एट द टॉप’ पहुंचे तो दीपावली त्यौहार होने से वहां भारतीय व विदेशी पर्यटकों का हजूम सा उमड़ा हुआ था, एक दृष्टि से सम्पुर्ण दुनिया के पर्यटकों का ताँता सा लगा हुआ नजर आ रहा था, जब एट द टॉप पहुंचे तो 124 वी मन्ज़िल से वैसे ही दृश्य नजर आ रहे थे जो हवाई जहाज में बैठने के बाद आसमान से धरती की और निहारने जैसे नजर आते हैं, इस बिल्डिंग के समीप से गुजरने वाले वाहन तो खिलौना कारें जैसी ही photo-2दिखाई दे रही थी, जब हम एट द टॉप पहुंचते हैं तो वहां तय शुद्धा फोटोग्राफर आपको तस्वीर खिंचवाने हेतु आग्रह करते नजर आते हैं, लेकिन जब आप उक्त फोटो खिंचवाने का शुल्क पूछते हैं तो दाम सुनकर दिमाग चकरा जाता हैं, उनके द्वारा खेंचे जाने वाले फोटोग्राफ के दाम 50-100 या 500-1000 भारतीय मुद्रा नही बल्कि इससे भी कई गुणा ज्यादा था, हालाँकि कुछ फोटो तो वे विशेष परिधानों तथा समृद्ध लगने वाले पर्यटकों के बिना शुल्क लिए खेंच देते हैं, और जब आप नीचे के द्वार photo6से बाहर निकलते हैं तो आपके वे फोटो प्रदर्शित हुए आपको स्पष्ट नजर आते हैं, कई पर्यटक तो अपने ही इन आकर्षक फोटो को मुंह मांगे दामों में खरीद ही लेते हैं, और कुछ फोटो को निहार कर आगे की और रुख कर देते हैं, वेसे एट द टॉप भी दुनिया का तीसरा विशाल अवलोकन डेक है, कुल 211 मन्ज़िल की इस बिल्डिंग में कई कोरपरेट हॉउस, हॉटल, सिनेमगृह कॉमर्शियल एंव रेजिडेंशल एपार्टमेंट हैं, इसमें कई भारतीय उद्योगपति, बिल्डर,ज्वेलर, फ़िल्म अभिनेताओं, राजनेताओं के एपार्टमेंट व कॉमर्शियल photo13प्रोपर्टीज हैं, बुर्ज खलीफा बिल्डिंग की नींव 2004 में खुदी, 2010 में निर्माण कार्य सम्पन्न हुआ और उसी वर्ष इस बिल्डिंग का लोकार्पण हुआ, वैसे बिल्डिंग का निर्माण 828.8 मीटर(2716.5 फुट) छत तक लम्बाई 828 मीटर (2717 फुट) नोक तक 828.8 मीटर, शीर्ष मन्ज़िल 454.5 मीटर(1918 फुट) लम्बी हैं वैसे इस बिल्डिंग में कुल मंजिलों की संख्या 211 बताई जाती हैं, 76 वीं मन्ज़िल पर मुस्लिम धर्मावलम्बियों के इबादत हेतु मस्जिद हैं,यह उल्लेखनीय हैं कि इस बिल्डिंग का कुल वजन एक लाख हाथियों के समकक्ष हैं, तथा 96 किलो मीटर की दुरी से भी यह बिल्डिंग देखी जा सकती हैं, 124 वीं मन्ज़िल अतार्थ एट द टॉप (रख-रखाव चोकी) 452 मीटर(1483 फुट) ऊंचाई पर हैं, इस बिल्डिंग में केरला राज्य के निवासी श्री जॉर्ज वी मेरी परम्बिल नामक भारतीय के 22 एपार्टमेंट खरीदे हुए हैं, यह एपार्टमेंट किसी रिश्तेदार के ताना मारने की बदौलत खरीदे गएphoto4, हुआ यह कि उक्त रिश्तेदार ने जॉर्ज को कहा कि तुम बुर्ज खलीफा में जाओगे? वहां तुम जैसों को तो एंट्री ही नही हैं, फिर क्या? एक दिन खलीज टाइम्स में विज्ञापन पढ़ा कि बुर्ज खलीफा में एक अपार्टमेंट बिकाऊ हे, बस इतनी देर भर थी, जॉर्ज ने वो एपार्टमेंट अविलम्ब खरीद डाला, उसके बाद तो जॉर्ज रुके ही नही बल्कि एक-एक कर के कुल 22 एपार्टमेंट खरीद डाले, 900 एपरमेंटो से युक्त इस बुर्ज खलीफा बिल्डिंग में 330.000 क्यूबिक मीटर कांक्रीट तथा अकेले नींव में 45000 क्यूबिक मीटर कांक्रीट डाला गया हैं, 55000 हजार टन स्टील, 26000 ग्लास पेनल उपयोग में आया हैं, इस हेतु 300 चीनी क्लेइडा स्पेशलिस्ट इंजीनियर आए, इस बिल्डिंग के बाहरी हिस्से को LED लाइटिंग से ऐसा सजाया गया हैं कि रात्रि में बाहर की रंगीन रौशनी को वहांसे गुजरने वाला हर कोई देखे बिना नही रहेगा इस बिल्डिंग को रौशनी में नहाए रखने हेतु 76 हजार किलो मीटर केबल इस्तेमाल किया गया हैं,, यह बिल्डिंग यु ए ई के खलीफा बिन जाएद अल नहियन ने बनाई थी,? तथा इसके वास्तुकार एडमिन स्मितकार तथा संरचनाकार विलियम बेकर व इंजीनियर हैदर कंसल्टिंग व समसुंग इंजीनियरिंग कम्पनी हे, व एम् आर ग्रुप निर्माण सहयोगी हैं।

संपादकीय सलाहकार- श्री गणपत भंसाली




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